Tuesday, February 27, 2024
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न दफ्तर, न दफ्तरी, न दस्तावेज : पीपीपी से मिली प्रदेश के लोगों को घर बैठे सरकारी सुविधाओं का लाभ

ढाई वर्ष के भीतर 65 लाख परिवारों ने पीपीपी का लाभ उठाना किया शुरू

प्रदेश में बचे 10 फीसदी परिवारों को पीपीपी के दायरे में लाने का काम तेज

हिंदुस्तान तहलका / दीपा राणा – फरीदाबाद। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने प्रदेश में परिवार पहचान पत्र से बाहर रह गए करीब दस प्रतिशत परिवारों को परिवार पहचान पत्र के दायरे में लाने के लिए अधिकारियों से तेजी से काम करने को कहा है। स्कीम लागू होने के ढाई वर्ष के भीतर ही प्रदेश के 65 लाख परिवारों ने इसका लाभ उठाना शुरू कर दिया है। लोगों को घर बैठे सरकारी सेवाओं और स्कीमों का लाभ देने वाली इस व्यवस्था में ढाई करोड़ से अधिक लोग शामिल हो चुके हैं। लाभार्थियों को अब न तो सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं, कर्मचारियों की चिरौरी से भी मुक्ति मिल गई है और दस्तावेज जमा कराने के झंझटों से भी निजात मिल गई है। लोग केवल एक आईडी से प्रदेश सरकार के विभिन्न विभागों की साढ़े पांच सौ से अधिक सरकारी योजनाओं और सेवाओं का लाभ ले रहे हैं

प्रदेश के 65 लाख अधिक परिवार हुए पंजीकृत

प्रदेश के नागरिकों को अब बुजुर्ग सम्मान पेंशन के लिए साठ वर्ष की आयु पार करते ही पेंशन स्कीम में उन्हें शामिल कर लिया जाता है। इसके लिए दफ्तरों के चक्कर काटने की आवश्यकता नहीं होती। परिवार पहचान पत्र में दर्ज व्यक्ति के साठ वर्ष पूरा होने के तुरंत बाद सरकारी प्रतिनिधि स्वतः उनकी पेंशन के लिए सारी कार्यवाही पूरी करने उसके घर पहुंच जाता है। सितंबर 2021 से लागू हुई परिवार पहचान पत्र स्कीम में अब तक प्रदेश के 65 लाख अधिक परिवारों के 2.57 करोड़ से अधिक सदस्यों को पीपीपी में पंजीकृत किया जा चुका है। पीपीपी में दर्ज होने के तुरंत बाद प्रदेश के नागरिक सरकारी योजनाओं का लाभ पाने के हकदार हो जाते हैं। पलवल के कालू राम, सुरेश कुमार, फरीदाबाद के नरेश ने बताया कि पीपीपी के तहत उन्हें घर बैठे सरकार की सुविधा मिल रही है। सरकार का यह सराहानीय कदम रहा है। सोनू ने बताया कि उसका नाम घर बैठे बीपीएल सूची में शामिल हो गया है।

सीएम की दूरदर्शी सोच से उपजी स्कीम

पीपीपी मुख्यमंत्री मनोहर लाल की दूरदर्शी सोच से उपजी स्कीम है। इससे पहले लोगों को सरकारी सुविधाओं का लाभ प्राप्त करने के लिए सरकारी कार्यालयों के चक्कर काटने पड़ते थे। दस्तावेज जमा कराने के लिए खिड़की-खिड़की भटकना पड़ता था और कर्मचारियों-अधिकारियों के पीछे पीछे घूमना पड़ता था। पात्र होने के बावजूद लोगों को अपनी सुविधा शुरू करवाने के लिए रिश्वत देनी पड़ती थी। लोगों को इस परेशानी से निजात दिलाने के लिए ही वर्ष 2020 में मुख्यमंत्री ने इस स्कीम पर काम करने का निर्णय लिया।
हरियाणा का परिवार पहचान पत्र अन्य राज्यों के लिए भी अनुकरणीय बन गया है। पीपीपी के माध्यम से आज प्रधानमंत्री आवास योजना (पीएमएएवाई), आयुष्मान भारत योजना, राशन कार्ड, सभी प्रकार की पेंशन योजनाएं, विभिन्न छात्रवृत्ति योजनाएं, आरसी/ड्राइविंग लाइसेंस जारी करना, समाज कल्याण योजनाएं, कृषि, बागवानी विभागों की योजनाएं, स्कूल, कॉलेज आदि में प्रवेश सहित अन्य पात्रता के अनुसार अन्य योजनाओं का घर बैठे लाभ मिल रहा है।

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