हिन्दुस्तान तहलका / पंकज सविता
फरीदाबाद। चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर शनिवार को शहर में आस्था और श्रद्धा का अनूठा संगम देखने को मिला। नवरात्रि के आठवें दिन मां महागौरी की पूजा अर्चना विधि-विधान से की गई। सुबह से ही मंदिरों में श्रद्धालु मां महागौरी के दर्शन करने और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए मंदिरों की ओर उमड़ पड़े। मंदिरों में विशेष सजावट की गई है।
घर-घर हुआ कन्या पूजन
अष्टमी के दिन कन्या पूजन का विशेष महत्व होता है। इस अवसर पर शहरवासियों ने नौ कन्याओं और एक लांगुरिया स्वरूप बालक का पूजन किया। भक्तों ने कन्याओं के पैर धोकर, मंगल तिलक लगाकर चुनरी ओढ़ाई और आरती की। हलवा, पूरी, चने अन्य पकवान बना कर कंजक को भोग लगाया और उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। वहीं कंजक को विदा करते समय विभिन्न प्रकार के उपहार भी दिए। आठवें नवरात्र पर मंदिरों में मां महागौरी की पूजा श्रद्धा के साथ हुई। कई मंदिरों में भी पूजा अर्चना करके कंजकों को भोजन करवाया गया।
संत मुनिराज महाराज ने बताया कि कन्या पूजन के दौरान कन्याओं को लाल कपड़े में थोड़े चावल के साथ एक रुपये का सिक्का जरूर देना चाहिए। इसके अतिरिक्त भी यथाशक्ति दान कर सकते हैं। इससे घरों में मां लक्ष्मी का वास हमेशा रहेगा। उधर अष्टमी से पहले दिन शुक्रवार को बाजारों में पूजन के सामान के साथ उपहारों की खूब खरीदारी की गई।

ढूंढने से भी नहीं मिली कंजक
अष्टमी पूजन पर शनिवार को कई गली मोहल्लों में लोगों को ढूंढने से भी कंजक नहीं मिलीं। दस वर्ष से कम आयु की कंजक को ढूंढने के प्रयास में लोगों ने पहले इधर उधर भटकते रहे, फिर कहीं जाकर उन्हें कंजक माता का आशीर्वाद प्राप्त हुआ। कई कई जगह तो एक-एक कंजक का 10-10 घर में पूजन किया गया। कंजक पूजन के लिए लोगों ने घरों में लाइन लगा कर अपने घर पर पूजा की। वहीं, कई जगह कंजक की बुधवार रात को ही एडवांस में बुकिंग की गई।
नन्ही बेटी के पैरों की लगवाई ‘छाप’

अष्टमी को यादगार बनाने के लिए वैष्णवी राणा ने मां दुर्गा के प्रतीक के रूप में अपनी आठ माह की बेटी राधिका के पैरों को ‘कुमकुम’ में डुबोकर उसके पैरों की छाप एक कपड़े पर लगाई। ऐसा पुराणों के अनुसार बेटी के पैरों के छापे को तिजोरी में रखना सबसे शुभ माना जाता है। तिजोरी में लक्ष्मी होती है और बेटी को भी मां लक्ष्मी का रूप माना जाता है।


