नई दिल्ली | 14 जुलाई 2025
हिंदुस्तान तहलका / विष्णु हरि पाठक
8 दिनों तक अंतरिक्ष की रहस्यमयी दुनिया में रहने के बाद, भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला अब धरती पर लौट रहे हैं। अमेरिकी कंपनी एक्सियम स्पेस के AX-4 मिशन के तहत 25 जून को उन्होंने अमेरिका के फ्लोरिडा से उड़ान भरी थी और 26 जून को इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) पहुंचे थे। अब यह ऐतिहासिक मिशन अपने अंतिम चरण में है।
भारत का ‘सारे जहाँ से अच्छा’ अंतरिक्ष से फिर गूंजा
शुभांशु शुक्ला ने राकेश शर्मा की याद दिलाते हुए कहा:
“आज का भारत महत्वाकांक्षी है, निडर है, आत्मविश्वासी है। आज का भारत आज भी ‘सारे जहाँ से अच्छा’ दिखता है।”
रविवार को ISS में हुए विदाई समारोह में उन्होंने ये भावुक शब्द कहे, जो हर भारतीय को गौरव से भर देते हैं।
कौन हैं शुभांशु शुक्ला?
शुभांशु शुक्ला, उत्तर प्रदेश के मूल निवासी हैं। वो पहले भारतीय हैं जिन्होंने एक प्राइवेट स्पेस मिशन के ज़रिए ISS तक की यात्रा की। 1984 में राकेश शर्मा के बाद वो अंतरिक्ष में जाने वाले दूसरे भारतीय हैं।
इस मिशन के लिए भारत सरकार और ISRO ने क़रीब 550 करोड़ रुपये की भागीदारी की, ताकि यह अनुभव गगनयान मिशन (2027) की तैयारी में मदद कर सके।
18 दिन अंतरिक्ष में क्या किया शुभांशु ने?
शुभांशु ने ISS में रहते हुए कई महत्वपूर्ण वैज्ञानिक प्रयोग किए, जिनमें शामिल थे:
माइक्रोएल्गी पर रिसर्च-
भविष्य में भोजन, ऑक्सीजन और बायोफ्यूल के लिए माइक्रोएल्गी उपयोगी साबित हो सकते हैं।
इनकी सहनशीलता अंतरिक्ष के कठिन वातावरण में जीवन के नए रास्ते खोल सकती है।
वॉयेजर डिस्प्ले स्टडी-
अंतरिक्ष में आंखों की गति और कोऑर्डिनेशन पर असर को समझने के लिए।
सेरेब्रल ब्लड फ्लो मॉनिटरिंग-
माइक्रोग्रैविटी और CO2 का और दिमाग़ और दिल की कार्यप्रणाली पर।
फोटॉनग्रैव न्यूरो टेस्ट-
दिमाग़ की गतिविधियों को ट्रैक कर भविष्य की Neuroadaptive तकनीकों की नींव।
Acquired Equivalence Test-
सीखने की क्षमता और मानसिक संतुलन को मापने के लिए मनोवैज्ञानिक अध्ययन।
इन प्रयोगों का लाभ न केवल भविष्य के मिशनों को होगा, बल्कि पृथ्वी पर चिकित्सा क्षेत्र में भी नई तकनीकों के विकास में सहायक होगा।
अब क्या होगा? – रिहैब और पृथ्वी पर वापसी
अंतरिक्ष से लौटने के बाद चारों एस्ट्रोनॉट्स को 7 दिन के पुनर्वास (rehabilitation) से गुजरना होगा ताकि उनका शरीर गुरुत्वाकर्षण के साथ सामंजस्य बना सके।
वापसी का कार्यक्रम-
14 जुलाई दोपहर 2:25 बजे (भारतीय समयानुसार) शुभांशु स्पेसशिप में बैठेंगे।
15 जुलाई दोपहर 3 बजे उनका यान अमेरिका के कैलिफ़ोर्निया तट के पास समुद्र में लैंड करेगा।
उनके साथ 580 पाउंड वैज्ञानिक उपकरण और डेटा भी लाया जा रहा है।
भारत के लिए क्या मायने रखता है ये मिशन?
इस मिशन से ISRO को गगनयान मिशन के लिए तकनीकी अनुभव और अंतरिक्ष में मानव व्यवहार को समझने में मदद मिलेगी।
इससे भारत की अंतरराष्ट्रीय स्पेस कम्युनिटी में भागीदारी और बढ़ेगी।
यह भारत के प्राइवेट स्पेस सेक्टर के लिए भी एक प्रेरणा है।
शुभांशु शुक्ला की यह यात्रा ना सिर्फ एक व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि यह भारत की अंतरिक्ष यात्रा में एक नया अध्याय जोड़ती है। अब भारत सिर्फ रॉकेट और सैटेलाइट तक सीमित नहीं, बल्कि मानव मिशनों में भी दुनिया के सबसे सक्षम देशों की कतार में खड़ा हो गया है।


