Tuesday, May 19, 2026
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अनंगपुर में तोड़फोड़ के विरोध में 19वें दिन भी धरना जारी, सांसद मनोज तिवारी ने दिया पीएम तक बात पहुंचाने का आश्वासन

हिंदुस्तान तहलका / संवादाता

फरीदाबाद के अनंगपुर गांव में तोड़फोड़ के खिलाफ चल रहे धरने को 19 दिन पूरे हो चुके हैं। ग्रामीणों का गुस्सा थमने का नाम नहीं ले रहा। इसी बीच उत्तर-पूर्वी दिल्ली से सांसद और भाजपा के वरिष्ठ नेता मनोज तिवारी धरना स्थल पर पहुंचे और ग्रामीणों की समस्याएं सुनीं। उन्होंने प्रदर्शनकारियों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से मिलवाने का आश्वासन दिया। साथ ही कहा कि वे इस मुद्दे को लोकसभा में भी उठाएंगे।

क्या है मामला?

1 जुलाई को अनंगपुर गांव में प्रशासन द्वारा तोड़फोड़ की कार्रवाई की गई थी, जिससे कई ग्रामीणों के घर, दुकानों और आजीविका को नुकसान पहुँचा। इसके बाद से सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण गांव की चौपाल पर धरना दे रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि यह कार्रवाई अचानक और बिना पूर्व सूचना के की गई, जिससे गरीबों और मध्यमवर्गीय परिवारों पर कहर टूटा।

सांसद मनोज तिवारी का हस्तक्षेप

धरना स्थल पर पहुंचे मनोज तिवारी ने ग्रामीणों को आश्वासन दिया कि वे इस मामले को प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के समक्ष गंभीरता से उठाएंगे। उन्होंने कहा कि वे प्रधानमंत्री को पत्र लिखेंगे।मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से व्यक्तिगत मुलाकात करेंगे।लोकसभा में इस मुद्दे को उठाकर अनंगपुर के पक्ष में ठोस मांग रखेंगे।

भाजपा के शीर्ष नेतृत्व को भी इस मामले की जानकारी देंगे।उन्होंने ग्रामीणों से वादा किया कि वे जल्द दोबारा गांव आकर इस मुद्दे पर फॉलो-अप करेंगे।

ग्रामीणों की मांगें और दर्द

धरना स्थल पर मौजूद ग्रामीणों – सरपंच अजय पाल, हरीचंद, भीम सिंह, चमन भड़ाना, धर्म गुर्जर, रिंकू, विवेक भड़ाना समेत अन्य लोगों ने सांसद को बताया कि तोड़फोड़ से उनका जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। न तो उन्हें मुआवजा मिला, न ही पुनर्वास की कोई व्यवस्था की गई है। उनका कहना है कि उनके पास न रहने की जगह बची और न ही रोज़गार का कोई साधन।

केंद्रीय राज्य मंत्री का भी मिला था समर्थन

इससे पहले केंद्रीय राज्य मंत्री कृष्णपाल गुर्जर भी ग्रामीणों से मुलाकात कर चुके हैं और आश्वासन दे चुके हैं कि रिहायशी इलाकों में तोड़फोड़ नहीं होगी। साथ ही मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने भी सुप्रीम कोर्ट में सीईसी कमेटी के माध्यम से गांव को बचाने की गुहार लगाई है।

CEC का मतलब क्या है

CEC का फुल फॉर्म है:Central Empowered Committee (केंद्रीय सशक्त समिति)

यह समिति सुप्रीम कोर्ट द्वारा बनाई गई थी ताकि पर्यावरण और वन संबंधी मामलों की निगरानी की जा सके और अदालत को उचित रिपोर्ट दी जा सके।

CEC का काम क्या होता है?

यह सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर पर्यावरण संरक्षण से जुड़े मामलों की जांच करती है।

वन भूमि पर अवैध कब्जा, निर्माण या तोड़फोड़ जैसे मामलों पर जांच रिपोर्ट बनाती है।

यह समिति गैरकानूनी निर्माणों, माइनिंग और वन भूमि के दुरुपयोग पर अदालत को सुझाव देती है कि क्या कार्रवाई की जानी चाहिए।

अनंगपुर मामले में CEC की भूमिका-

अनंगपुर गांव अरावली क्षेत्र में आता है, जो कि वन क्षेत्र (Forest Zone) घोषित है।

यहाँ किसी भी निर्माण, कब्जा या तोड़फोड़ का मामला हो, तो उसकी निगरानी और रिपोर्टिंग CEC द्वारा की जाती है।

हरियाणा सरकार और ग्रामीणों ने CEC से अनुरोध किया है कि गांव को बसाहट के रूप में मान्यता मिले और रिहायशी इलाकों को बचाया जाए।

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने भी सुप्रीम कोर्ट में CEC के माध्यम से गांव को बचाने की गुहार लगाई है।

अब उम्मीदें तिवारी पर टिकीं

सांसद तिवारी के हस्तक्षेप से धरने पर बैठे लोगों को नई उम्मीद मिली है। ग्रामीणों को लगता है कि अब उनकी आवाज़ राष्ट्रीय स्तर पर सुनी जाएगी और सरकार उनके हित में कोई ठोस कदम उठाएगी। उनका कहना है कि वे जब तक न्याय नहीं मिलेगा, तब तक धरना जारी रखेंगे।

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