हिंदुस्तान तहलका / संवादाता
भारत का लोकतंत्र संसद पर आधारित है, और संसद के सत्र (Sessions) इस लोकतांत्रिक व्यवस्था की कार्यप्रणाली का मूल हिस्सा हैं। संविधान में सत्रों का कोई निश्चित कैलेंडर नहीं है, लेकिन परंपरागत रूप से भारत में संसद वर्ष में तीन बार बैठक करती है। इन सत्रों के माध्यम से ही संसद में विधेयक पारित होते हैं, नीतियों पर चर्चा होती है और सरकार को उत्तरदायी बनाया जाता है।
संसद का सत्र क्या होता है?
सत्र का अर्थ है वह अवधि जब संसद कार्य कर रही होती है यानी जब लोकसभा और राज्यसभा की बैठकें हो रही होती हैं। एक सत्र में कई बैठकें हो सकती हैं।
सत्र का आह्वान (Summoning): भारत के राष्ट्रपति संसद के सत्र को बुलाते हैं।
कानूनी शर्त: दो सत्रों के बीच अधिकतम अंतर 6 महीने से अधिक नहीं होना चाहिए। इसलिए, संसद वर्ष में कम से कम दो बार अवश्य बैठती है।
भारत में संसद के तीन मुख्य सत्र
1. बजट सत्र (Budget Session)
समय: फरवरी से मई
महत्व: यह वर्ष का सबसे लंबा और महत्वपूर्ण सत्र होता है।
मुख्य कार्य:राष्ट्रपति के अभिभाषण से शुरुआत
केंद्रीय बजट की प्रस्तुति (वित्त मंत्री द्वारा)
बजट पर चर्चा और संबंधित विधेयकों का पारित होना
विशेषता: यह दो हिस्सों में विभाजित होता है – पहला हिस्सा बजट पेश करने और दूसरा चर्चा एवं पारित करने के लिए।
2. मानसून सत्र (Monsoon Session)
समय: जुलाई से सितंबर
महत्व: यह बजट सत्र के बाद होता है, और इसमें कई विधायी कार्य किए जाते हैं।
मुख्य कार्य: जनहित से जुड़े मुद्दों पर चर्चा, विपक्ष द्वारा सरकार से जवाबदेही की मांग।
3. शीतकालीन सत्र (Winter Session)
समय: नवंबर से दिसंबर
महत्व: यह सबसे छोटा सत्र होता है।
मुख्य कार्य: लंबित विधेयकों पर चर्चा, महत्वपूर्ण सरकारी निर्णयों पर बहस।
संसद का संयुक्त सत्र (Joint Sitting of Parliament)
अनुच्छेद 108 के अनुसार:
यदि कोई विधेयक लोकसभा में पारित होकर राज्यसभा में अटक जाता है, तो राष्ट्रपति संयुक्त बैठक बुला सकते हैं।
संयुक्त तब बुलाया जाता है जब राज्यसभा विधेयक को अस्वीकार कर दे अथवा दोनों सदनों में संशोधनों पर सहमति न बने।
ध्यान दें: संयुक्त सत्र की अध्यक्षता लोकसभा अध्यक्ष करते हैं।
संसद से जुड़े प्रमुख शब्द (Important Parliamentary Terms)
1. कोरम (Quorum)
सदन की बैठक चलाने के लिए न्यूनतम उपस्थिति:
लोकसभा: 55 सदस्य (545 का 1/10)
राज्यसभा: 25 सदस्य (245 का 1/10)
2. स्थगन (Adjournment)
जब सदन को कुछ समय के लिए रोका जाता है — जैसे दिन, घंटे या सप्ताह के लिए।
3. अनिश्चितकालीन स्थगन (Adjournment Sine Die)
जब अगली बैठक की कोई तिथि तय नहीं की जाती, तब यह स्थगन अनिश्चित काल का माना जाता है।
4. सत्रावसान (Prorogation)
सत्र समाप्त करने की प्रक्रिया जिसे राष्ट्रपति द्वारा किया जाता है।
यह सदन का विघटन नहीं है।
केवल लोकसभा को ही भंग किया जा सकता है; राज्यसभा को नहीं।
भारत में संसद के सत्र राष्ट्रीय विधायिका की रीढ़ हैं। बजट सत्र आर्थिक दिशा तय करता है, मानसून सत्र जवाबदेही और जनहित सुनिश्चित करता है, जबकि शीतकालीन सत्र लंबित कार्यों को निपटाने का समय होता है। इनके माध्यम से देश में नियम, कानून और नीतियां तय होती हैं।


