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जीएसटी परिषद् की 56वीं बैठक: आम आदमी और उद्योग जगत को मिली बड़ी राहत

हिंदुस्तान तहलका / विष्णु हरि पाठक

नई दिल्ली में 3 सितंबर 2025 को जीएसटी परिषद् की 56वीं बैठक केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारामन की अध्यक्षता में आयोजित हुई। इस बैठक में ऐसे कई अहम फैसले लिए गए जो सीधे तौर पर आम जनता, छोटे व्यापारियों, किसानों, उद्योगों और मध्यम वर्ग के लिए राहत लेकर आएंगे। यह बैठक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा स्वतंत्रता दिवस पर घोषित अगली पीढ़ी के जीएसटी सुधारों का हिस्सा है जिसका उद्देश्य कर ढांचे को सरल बनाना और नागरिकों के जीवन स्तर को बेहतर करना है।

कर ढांचे में बड़ा सुधार-

अब तक जीएसटी का 4-स्तरीय टैक्स ढांचा लागू था जिसे बदलकर सरल संरचना अपनाई गई है। अब केवल दो मुख्य दरें होंगी—18% का स्टैंडर्ड रेट और 5% का मेरिट रेट जबकि कुछ चुनिंदा वस्तुओं व सेवाओं पर 40% का डिमेरिट रेट लागू रहेगा। इसका सीधा फायदा उपभोक्ताओं और व्यापारियों दोनों को होगा।

बीमा सेवाओं पर राहत

परिषद ने आम आदमी को ध्यान में रखते हुए जीवन बीमा और स्वास्थ्य बीमा पर बड़ा फैसला लिया है। सभी निजी जीवन बीमा पॉलिसियों (टर्म लाइफ, यूएलआईपी, एंडोमेंट) और उनके पुनर्बीमा पर अब जीएसटी नहीं लगेगा। निजी स्वास्थ्य बीमा पॉलिसियों, फैमिली फ्लोटर और वरिष्ठ नागरिकों की योजनाओं को भी जीएसटी से पूरी तरह छूट दी गई है। इससे बीमा प्रीमियम किफायती होगा और अधिक लोग बीमा कवरेज ले सकेंगे।

रोजमर्रा की जरूरतों पर कर में कटौती

आम आदमी के लिए कई रोजमर्रा की वस्तुओं पर जीएसटी घटा दिया गया है। हेयर ऑयल, शैंपू, साबुन, टूथब्रश, टूथपेस्ट, साइकिल, रसोई के सामान आदि पर जीएसटी 18%/12% से घटाकर 5% कर दिया गया। दूध (यूएचटी), पैक्ड पनीर, छेना और सभी भारतीय ब्रेड (चपाती, पराठा आदि) पर जीएसटी पूरी तरह हटा दिया गया है। नमकीन, नूडल्स, पास्ता, सॉस, कॉफी, चॉकलेट और कई पैकेज्ड फूड प्रोडक्ट्स पर जीएसटी को 12%/18% से घटाकर 5% किया गया है।

स्वास्थ्य सेवाओं को सस्ता करने के कदम-

स्वास्थ्य क्षेत्र को लेकर भी अहम फैसले हुए हैं। 33 जीवनरक्षक दवाओं पर जीएसटी शून्य कर दिया गया है। कैंसर, दुर्लभ और गंभीर बीमारियों के इलाज वाली तीन प्रमुख दवाओं को भी टैक्स मुक्त किया गया। अन्य सभी दवाओं पर जीएसटी 12% से घटाकर 5% कर दिया गया। सर्जिकल, डेंटल और डायग्नोस्टिक उपकरणों पर टैक्स को 18% से घटाकर 5% किया गया। ग्लूकोमीटर, बैंडेज, गॉज और अन्य चिकित्सा उपकरणों को भी 5% स्लैब में शामिल किया गया। इससे इलाज की लागत में बड़ी कमी आएगी।

वाहन और परिवहन क्षेत्र को राहत-

छोटी कारें और 350 सीसी से कम की मोटरसाइकिलों पर टैक्स 28% से घटाकर 18% कर दिया गया। बस, ट्रक और एंबुलेंस पर भी जीएसटी 28% से घटाकर 18% किया गया। तीन पहिया वाहनों और सभी ऑटो कलपुर्जों पर अब एक समान 18% टैक्स लगेगा। 32 इंच तक के टीवी, वॉशिंग मशीन, एसी और डिशवॉशिंग मशीन पर भी टैक्स 28% से घटाकर 18% कर दिया गया।

कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को समर्थन-

किसानों और कृषि उपकरण निर्माताओं को ध्यान में रखते हुए:
ट्रैक्टर, जुताई, कटाई और बागवानी उपकरणों पर टैक्स 12% से घटाकर 5% किया गया। उर्वरक क्षेत्र में भी सुधार करते हुए सल्फ्यूरिक एसिड, नाइट्रिक एसिड और अमोनिया पर जीएसटी 18% से घटाकर 5% किया गया। नवीकरणीय ऊर्जा उपकरणों और उनके पुर्जों पर टैक्स 12% से घटाकर 5% कर दिया गया।

श्रम-प्रधान उद्योगों को बढ़ावा-

हस्तशिल्प, संगमरमर, ग्रेनाइट और चमड़े के सामान पर जीएसटी 12% से घटाकर 5% कर दिया गया है। इससे कारीगरों और लघु उद्योगों को सीधा फायदा मिलेगा।
रियल एस्टेट और निर्माण क्षेत्र को राहत देते हुए सीमेंट पर जीएसटी को 28% से घटाकर 18% कर दिया गया है। यह कदम रियल एस्टेट क्षेत्र को सस्ती लागत और तेज़ी से विकास की दिशा में मदद करेगा।

होटल और सेवाओं पर असर-


7,500 रुपये प्रति दिन से कम किराए वाले होटल कमरों पर जीएसटी 12% से घटाकर 5% कर दिया गया। जिम, सैलून, नाई की दुकान, योग केंद्र जैसी सेवाओं पर भी टैक्स 18% से घटाकर 5% कर दिया गया। इससे आम उपभोक्ता और सेवा क्षेत्र दोनों को फायदा होगा।

जीएसटी परिषद की 56वीं बैठक ने कर ढांचे को न केवल सरल बनाया है बल्कि इसे जन-केंद्रित और व्यापार-हितैषी भी बनाया है। बीमा, स्वास्थ्य, कृषि, उद्योग और सेवा क्षेत्र में किए गए सुधारों से एक ओर जहां आम जनता को राहत मिलेगी वहीं दूसरी ओर कारोबारियों के लिए ईज ऑफ डूइंग बिजनेस आसान होगा।

इन फैसलों से स्पष्ट है कि सरकार जीएसटी को केवल राजस्व जुटाने का साधन नहीं बल्कि सामाजिक और आर्थिक विकास का उपकरण बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

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