Tuesday, May 19, 2026
No menu items!
spot_img
Homeअन्य राज्यडिलीवरी बॉय का काम करने वाले सूरज यादव बने डिप्टी कलेक्टर, संघर्ष...

डिलीवरी बॉय का काम करने वाले सूरज यादव बने डिप्टी कलेक्टर, संघर्ष की कहानी बनी मिसाल

झारखंड के गिरिडीह ज़िले के कपिलो पंचायत के रहने वाले सूरज यादव आज लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुके हैं। कभी परिवार चलाने के लिए डिलीवरी बॉय और कोचिंग टीचर का काम करने वाले सूरज ने झारखंड पब्लिक सर्विस कमीशन (JPSC) की परीक्षा में 110वीं रैंक हासिल की है। अब वे डिप्टी कलेक्टर बनेंगे।

संघर्षों से भरी रही ज़िंदगी-

आर्थिक तंगी के कारण सूरज यादव को पढ़ाई के साथ-साथ परिवार की जिम्मेदारियाँ भी निभानी पड़ीं। उन्होंने कभी कॉल सेंटर में काम किया तो कभी कोचिंग में बच्चों को पढ़ाया। हालात ऐसे आए जब उन्हें स्विगी और रैपिडो के लिए डिलीवरी बॉय तक बनना पड़ा।

पत्नी और परिवार ने हमेशा सूरज का साथ दिया। उनकी पत्नी पूनम कुमारी ने खुद आर्थिक परेशानियों को झेला लेकिन सूरज को कहा कि आप सिर्फ पढ़ाई पर ध्यान दें।यही हौसला सूरज की सबसे बड़ी ताक़त बना।

पहली बार असफल लेकिन हिम्मत नहीं हारी-

साल 2022 में जब उन्होंने पहली बार JPSC परीक्षा दी तो सात अंकों से मेंस में रह गए। उस वक्त हालात और भी कठिन हो गए लेकिन सूरज ने हिम्मत नहीं छोड़ी। उन्होंने छात्रों को पढ़ाया एक किताब भी लिखी और तैयारी जारी रखी।

डिलीवरी बॉय से डिप्टी कलेक्टर तक-

रांची में रहते हुए सूरज को जब कोचिंग में नौकरी नहीं मिली तो दोस्तों की मदद से बाइक लेकर वे डिलीवरी बॉय बने। दिन में पढ़ाई और रात में काम करके उन्होंने परिवार का खर्च और तैयारी दोनों संभाली।

2025 में JPSC इंटरव्यू के दौरान जब उन्होंने बताया कि वे डिलीवरी बॉय का काम करते थे तो बोर्ड ने उनसे डिलीवरी से जुड़े तकनीकी सवाल पूछे। सूरज ने सभी सवालों के सटीक जवाब दिए और अपनी लगन साबित कर दी।

25 जुलाई 2025: सपना हुआ सच-

25 जुलाई 2025 को जब JPSC का फाइनल रिज़ल्ट आया तो सूरज की मेहनत रंग लाई। उनका चयन डिप्टी कलेक्टर के पद पर हुआ। नतीजे देखकर उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े।

सूरज अपनी सफलता का श्रेय परिवार की महिलाओं – मां, पत्नी और सास को देते हैं। पत्नी पूनम कुमारी ने कहा

आज हमें वह इज़्ज़त मिल रही है जो हमने कभी सपने में भी नहीं सोची थी।

सूरज यादव की यह सफलता दिखाती है कि चाहे हालात कितने भी मुश्किल क्यों न हों मेहनत, धैर्य और परिवार का साथ हो तो हर सपना पूरा किया जा सकता है। डिलीवरी बॉय से डिप्टी कलेक्टर बनने की उनकी यह कहानी हर युवा के लिए प्रेरणा है।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments

Translate »