तहलका जज्बा / दीपा राणा
फरीदाबाद। मानव रचना यूनिवर्सिटी में शुक्रवार को इनोवेशन इन फ्लाइट लैबोरेटरी फॉर यूथ ‘आईएफएलवाई ड्रोन लैब’ का उद्घाटन हुआ। यह लैब एआईसीटीई और एवीपीएल की मदद से बनाई गई है। यहां छात्र ड्रोन उड़ाना, बनाना और उसकी मरम्मत करना सीखेंगे।
इस लैब में कंप्यूटर साइंस, मैकेनिकल, इलेक्ट्रॉनिक्स, रोबोटिक्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के छात्रों को ड्रोन पायलट, सर्विस टेक्नीशियन और बैटरी एक्सपर्ट बनने की ट्रेनिंग दी जाएगी। इसका उद्घाटन समारोह में नेशनल एजुकेशनल टेक्नोलॉजी फोरम के अध्यक्ष प्रो. (डॉ.) अनिल सहस्रबुद्धे ने किया। इस अवसर पर एआईसीटीई के अध्यक्ष प्रो. टीजी. सीताराम और मानव रचना शैक्षणिक संस्थानों के वरिष्ठ गणमान्य अतिथि भी उपस्थित रहे।

प्रो. अनिल सहस्रबुद्धे ने कहा कि आज की पीढ़ी को उन तकनीकों का वास्तविक अनुभव मिलना चाहिए जो भारत के भविष्य को दिशा देंगी। आईएफएलवाई सिर्फ एक प्रशिक्षण केंद्र नहीं, बल्कि यह शैक्षणिक उत्कृष्टता और राष्ट्रीय आवश्यकता का समागम है। कृषि, इन्फ्रास्ट्रक्चर, रक्षा और आपातकालीन सेवाओं में ड्रोन की भूमिका निरंतर बढ़ रही है और ऐसे में मानव रचना की यह पहल तकनीकी शिक्षा के सही भविष्य को दर्शाती है।
एआईसीटीई के अध्यक्ष प्रो. टीजी. सीताराम ने बताया कि हम एक ऐसे समय में जी रहे हैं जहां एआई, मशीन लर्निंग, ब्लॉकचेन, रोबोटिक्स, क्वांटम कंप्यूटिंग और बायोटेक्नोलॉजी जैसी तकनीकें उद्योगों को पुनर्परिभाषित कर रही हैं। ऐसे में जीवनभर सीखना और लगातार स्किल्स को अपग्रेड करना अब विकल्प नहीं, बल्कि आवश्यकता बन चुका है। वहीं एवीपीएल के राजीव गुलाटी ने कहा कि आईएफएलवाई लैब से छात्र ड्रोन निर्माण और डिजाइन के साथ-साथ कृषि और सिविल इंजीनियरिंग जैसे कई क्षेत्रों में काम करने के लिए तैयार होंगे।
डॉ. प्रशांत भल्ला ने बताया कि आईएफएलवाई लैब एक ऐसा प्लेटफार्म है जहां नवाचार, कौशल और उद्योग एक साथ आते हैं। छात्र न केवल प्रमाणपत्र पाएंगे, बल्कि देश के ड्रोन उद्योग के भविष्य को भी आकार देंगे। संस्थान के कुलपति प्रो. दीपेंद्र कुमार झा ने कहा कि आईएफएलवाई लैब में छात्र रिसर्च, स्टार्टअप और उत्पाद विकास पर काम करेंगे। इसका उपयोग कृषि से लेकर आपदा प्रबंधन तक हर क्षेत्र में होगा। यह लैब ‘ड्रोन शक्ति’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ जैसे राष्ट्रीय अभियान के तहत भारत में ड्रोन पेशेवरों की बढ़ती मांग को पूरा करेगी।


