- सुप्रीम कोर्ट के सख्त आदेशों के तहत हुई कार्रवाई
- तीन एसीपी समेत कई थानों की पुलिस फोर्स
- लोगों का आरोप कोर्ट में विचाराधीन होने के बाद भी नगर निगम ने की कार्रवाई
हिन्दुस्तान तहलका / संवाददाता
फरीदाबाद। जमाई कॉलोनी में मंगलवार को सरकारी जमीन पर बनी धार्मिक स्थल समेत 50 से अधिक मकानों को ध्वस्त किया। अधिकारियों का कहना ही कि पिछले कई साल से यह लोग सरकारी जमीन पर कब्जा किए हुए है। निगम के एसडीओ सुरेंद्र हुडा ने बताया कि लोगों को तीन बार जमीन खाली करने के लिए नोटिस दिए जा चुके थे। इसके बावजूद लोगों ने जमीन खाली नहीं की। इसलिए आज नगर निगम की ओर से तोड़फोड़ की गई। इस तोड़फोड़ में 50 साल पुरानी मस्जिद भी नगर निगम ने तोड़ दी।

निगम का दावा किया हैं कि ये अवैध रूप से बनाई गई थी। मामला हाईकोर्ट के बाद सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।अधिकारी ने दावा किया कि सुप्रीम कोर्ट से आदेश मिलने के बाद यह कार्रवाई की गई। इस दौरान स्थानीय लोगों विरोध से बचने को भारी तादाद में पुलिस भी मौके पर मौजूद रही। दौरान तीन एसीपी के साथ करीब 250 पुलिसकर्मी मौजूद रहे।

नगर निगम के एसडीओ सुरेंद्र ने बताया कि जब तक अवैध कब्जे नहीं हट जाएंगे, तब तक नगर निगम का दस्ता यहां कार्रवाई जारी रखेगा। पूरे शहर में अवैध कब्जा और अतिक्रमण हटाने के लिए निगम की कार्रवाई लगातार जारी रहेगी। उधर, स्थानीय लोगों का कहना है कि मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन होने के बाद भी नगर निगम ने कार्रवाई की।

उनका कहना है कि जमीन का मालिकाना हक बड़खल गांव का है। उन्होंने बताया कि मस्जिद के लिए जमीन बड़खल गांव के पूर्व सरपंच रक्का ने दी थी। कुल 600-700 गज जमीन में से 40×80 वर्ग गज में मस्जिद बनी थी। बड़खल गांव की तरफ से 17-18 लोगों की एक कमेटी इस मामले की सुप्रीम कोर्ट में पैरवी कर रही है। उनका कहना है कि कुछ समय पहले नगर निगम ने क्षेत्र में बाउंड्री वॉल बनाई थी। उस समय मस्जिद को यह कहकर छोड़ दिया गया था कि इस पर कोई कार्रवाई नहीं होगी। उनका कहना है कि जब तक सुप्रीम कोर्ट से कोई अंतिम फैसला नहीं आता है, तब तक की गई ये कार्रवाई कोर्ट के आदेश की अवहेलना है।


