Thursday, May 23, 2024
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HomeहरियाणाHARYANA NEWS: पार्टियों के राजनीतिक खेल का शिकार 'हरियाणा' के 'दिग्गज' परिवार

HARYANA NEWS: पार्टियों के राजनीतिक खेल का शिकार ‘हरियाणा’ के ‘दिग्गज’ परिवार

कांग्रेस-भाजपा ने आखिर क्यों लगा दिया खुड्डे लाइन?

-भजनलाल, बंसीलाल और छोटूराम फैमिली चुनाव से दूर
-देवीलाल का ‘चौटाला परिवार’ ज्यादा चर्चित, हुड्डा परिवार सबसे मजबूत

नितिन गुप्ता, मुख्य संपादक
तहलका जज्बा / चंडीगढ़। हरियाणा की राजनीति में तीन दिग्गज सियासी परिवार इस बार भाजपा और कांग्रेस की राजनीतिक खेल में फंस गए हैं। चुनावी जोड़तोड़ से जीत की उम्मीद में इन दोनों पार्टियों ने तीनों परिवारों पर भरोसा नहीं किया। पूर्व मुख्यमंत्री भजनलाल व पूर्व मुख्यमंत्री बंसीलाल और किसान नेता छोटूराम के परिवार का कोई भी सदस्य इसबार लोकसभा चुनाव नहीं लड़ रहा हैं। भजनलाल-छोटूराम की फैमिली को पार्टी बदलकर भाजपा में जाना भारी पड़ गया। वहीं बंसीलाल परिवार को कांग्रेस ने ही किनारे कर दिया। वहीं पूर्व उप प्रधानमंत्री देवीलाल के चौटाला परिवार से तीन सदस्य ‘हिसार लोकसभा’ में चुनाव लड़कर सबसे ज्यादा चर्चा में हैं। हिसार से कोई भी पार्टी जीते बनेगा चौटाला सांसद ! ‘हरियाणा’ के तीन ‘दिग्गज’ परिवार राजनीतिक दलों के खेल का शिकार हुए हैं। जाट लैंड से जाना जाने वाले हरियाणा में हुड्डा परिवार मजबूती से उभरा है। देवीलाल के चौटाला परिवार के सबसे ज्यादा चर्चा है।

हरियाणा की राजनीतिक राजधानी रहे भिवानी, सिरसा, हिसार, रोहतक, करनाल

हरियाणा की राजनीति में भिवानी हरियाणा की राजनीतिक राजधानी इसलिए कहलाया, क्योंकि चौधरी बंसीलाल ने हरियाणा की राजनीति में अपना वर्चस्व रखा। इसी प्रकार से सिरसा को चौधरी देवीलाल के कारण व हिसार को भजनलाल के कारण, रोहतक को भूपेंद्र सिंह हुड्डा, करनाल को मनोहर लाल के कारण राजनीतिक राजधानी के दर्जे समय-समय पर मिलते रहे हैं।

हरियाणा में पूर्व मुख्यमंत्री बंसीलाल परिवार चुनाव से दूर

इस बार कांग्रेस ने भिवानी-महेंद्रगढ़ सीट से पूर्व सीएम बंसीलाल की पोती श्रुति चौधरी की टिकट काट दिया है। भाजपा में शामिल होने के बाद 26 साल बाद भजन लाल परिवार भी चुनाव मैदान से बाहर है। इस बार कुलदीप बिश्नोई को हिसार लोकसभा से टिकट नहीं मिला है। हरियाणा के अंदर कांग्रेस की गुटबाजी का शिकार हुयी श्रुति चौधरी को भिवानी से टिकट ना मिला। किरण चौधरी की राजनीति को करारे झटके से कम नहीं है। पूर्व मुख्यमंत्री बंसीलाल तीन बार 1980, 1984 और 1989 में लोकसभा सदस्य बने। उनके पुत्र चौ.सुरेंद्र सिंह दो बार 1996 व 1998 में लोकसभा सदस्य रहे। फिर बंसीलाल की पोती श्रुति चौधरी एक बार 2009 में सांसद बनीं। वर्ष 1991 में भी बंसीलाल परिवार से कोई चुनाव मैदान में नहीं था।

भजन लाल परिवार भी 26 साल बाद चुनाव मैदान से बाहर

चौधरी भजनलाल 3 बार हरियाणा के मुख्यमंत्री रहे। उनकी विरासत बेटे कुलदीप बिश्नोई संभाल रहे हैं। कुलदीप बिश्नोई जब 2014 में कांग्रेस में थे तो उन्हें हिसार से टिकट मिली। हालांकि वे तब इनेलो के दुष्यंत चौटाला से हार गए थे। इसके बाद कुलदीप पत्नी रेणुका बिश्नोई और बेटे भव्य बिश्नोई के साथ अगस्त 2022 में भाजपा में शामिल हो गए। इस बार कुलदीप हिसार सीट से टिकट के बड़े दावेदार थे। भाजपा में उनकी जगह टिकट पूर्व डिप्टी पीएम चौधरी देवीलाल के बेटे रणजीत चौटाला को मिल गई। हरियाणा में 26 साल बाद भजनलाल परिवार का भी कोई सदस्य चुनाव मैदान में नहीं उतरेगा। पूर्व मुख्यमंत्री भजनलाल 1989 में फरीदाबाद से और 1998 में करनाल से चुनाव जीतकर लोकसभा में पहुंचे थे। भजनलाल के बेटे कुलदीप बिश्नोई बीजेपी में शामिल हो चुके हैं।

छोटू राम परिवार की विरासत बीरेंद्र सिंह का परिवार किया किनारे

सर छोटूराम के परिवार की राजनीतिक विरासत उनके नाती पूर्व केंद्रीय मंत्री बीरेंद्र सिंह संभाल रहे हैं। बीरेंद्र सिंह के बेटे सेवानिवृत्त आईएएस एवं निवर्तमान सांसद बृजेंद्र सिंह 2019 में हिसार से भाजपा की टिकट पर लोकसभा चुनाव जीते। बृजेंद्र ने मार्च महीने में ही भाजपा छोड़ दी। इसके बाद वे कांग्रेस में शामिल हो गए। इसके बाद बीरेंद्र सिंह ने बेटे के लिए हिसार और सोनीपत सीट से दावेदारी जताई। उन्होंने हिसार को प्राथमिकता तक बताया। हालांकि कांग्रेस ने उन्हें झटका देते हुए कहीं से भी टिकट नहीं दी।

टिकट कटने के बाद परिवार के वारिस क्या करेंगे

भजनलाल परिवार के कुलदीप बिश्नोई हिसार से टिकट कटने पर वह नाराज हो गए। इसके बाद उन्होंने भाजपा के प्रचार से दूरी बना रखी है। हालांकि पहले पूर्व सीएम मनोहर लाल खट्टर फिर वर्तमान मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने उन्हें मना लिया है। जिसके बाद कुलदीप बिश्नोई ने कहा कि वे नाराज नहीं हैं और प्रचार करेंगे। हालांकि अभी वे प्रचार करने नहीं आए हैं। सर छोटूराम परिवार के बीरेंद्र सिंह ने बेटे की टिकट कटने के बाद समर्थकों की मीटिंग बुला ली है। यह मीटिंग 28 अप्रैल को होगी। बेटे को टिकट न देने पर बीरेंद्र सिंह ने कहा कि उनके बेटे की चुनाव लड़ने की इच्छा थी, पता नहीं कांग्रेस ने क्या सोचा?। उन्होंने यह भी कहा कि अगर कोई बुलाएगा, वे तभी किसी का प्रचार करने जाएंगे। पूर्व सांसद श्रुति चौधरी के भाजपा में शामिल होने की चर्चा है।

हुड्डा परिवार की राजनीतिक विरासत का आधार रोहतक लोकसभा

वर्ष 1952, 1957 में रणबीर हुड्डा सांसद बने। हरियाणा की राजनीतिक राजधानी तो कभी जाटलैंड के नाम से विख्यात रोहतक लोकसभा सीट से हुड्डा परिवार का सियासी गढ़ भी कहा जाता हैं। जिसमें इस परिवार को निवर्तमान सांसद डॉ.अरविंद शर्मा से कड़ी चुनौती दे रहे हैं। इस लोकसभा क्षेत्र से हुड्डा परिवार ने 11 बार चुनाव लड़ा और 9 बार जीत हासिल की। कांग्रेस प्रत्याशी दीपेंद्र हुड्डा अपनी पारिवारिक विरासत बचाने के लिए चुनाव लड़ेंगे। हालांकि 25 मई को होने वाली उनकी परीक्षा का परिणाम 4 जून को ही सामने आ पाएगा।

भूपेंद्र हुड्डा की देवीलाल पर हैट्रिक

वर्ष 1991 में कांग्रेस के भूपेंद्र हुड्डा ने जनता दल के देवीलाल को 30 हजार 573 वोटों से पराजित किया। वर्ष 1996 में कांग्रेस के भूपेंद्र हुड्डा ने समता पार्टी के देवीलाल को 2664 वोटों से हराया। वर्ष 1998 में हुए कांटे के मुकाबले में कांग्रेस के भूपेंद्र हुड्डा ने हरियाणा लोकदल के देवीलाल को 383 वोटों के मामूली अंतर से हराते हुए जीत की हैट्रिक बनाई। दिग्गज कांग्रेसी नेता भूपेंद्र हुड्डा ने ताऊ देवीलाल पर जीत की हैट्रिक लगाकर एक नया इतिहास बनाया था।

दिग्गज परिवारों को किनारे करने के पीछे सियासत क्या ?

बड़ा सवाल ये है कि आखिर इतने दिग्गज परिवारों को भाजपा और कांग्रेस ने साइडलाइन क्यों किया ? पॉलिटिकल एक्सपर्ट्स की मानें तो अक्टूबर-नवंबर में हरियाणा में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में दोनों पार्टियां किसी परिवार की पीछे चलने या चेहरे की सियासत में नहीं उलझना चाहती। उनकी कोशिश है कि संगठन के जरिए ही सियासत की जाए ताकि पार्टी को किसी तरह का प्रेशर न झेलना पड़े। इसके अलावा अपने किसी भी फैसले के लिए बड़े राजनीतिक परिवारों के आगे झुकना न पड़े। वे इन परिवारों को स्पष्ट संदेश देना चाहती हैं कि राजनीति में परिवार नहीं बल्कि पार्टी बड़ी होती है। इसलिए वे इनके आगे घुटने टेकने जैसी स्थिति में नहीं जा रहे हैं।

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