हिंदुस्तान तहलका / लोकेश गुप्ता
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों को लेकर 11 अगस्त को दिए गए अपने आदेश में बड़ा बदलाव करते हुए अब स्पष्ट कर दिया है कि सभी कुत्तों को शेल्टर होम में भेजना व्यावहारिक समाधान नहीं है। कोर्ट ने कहा कि केवल बीमार और आक्रामक कुत्तों को ही शेल्टर में रखा जाएगा, जबकि बाकी सभी को नसबंदी और टीकाकरण के बाद उन्हीं स्थानों पर वापस छोड़ा जाएगा जहां से उन्हें उठाया गया था। जस्टिस विक्रम नाथ की अगुवाई में तीन जजों की पीठ ने यह फैसला सुनाया। इसके साथ ही कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को नोटिस भी जारी किया है।
कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि कुत्तों की देखभाल के लिए सुनियोजित व्यवस्था जरूरी है, न कि अंधाधुंध उठाव और कैद। कोर्ट ने यह भी आदेश दिया कि हर ब्लॉक और वार्ड स्तर पर फीडिंग जोन बनाए जाएंगे, ताकि आवारा कुत्तों को केवल निर्धारित स्थानों पर ही भोजन दिया जाए।कोर्ट ने कहा कि सार्वजनिक स्थानों पर कुत्तों को खाना खिलाना प्रतिबंधित रहेगा। नियम तोड़ने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी और इसके लिए एक हेल्पलाइन नंबर जारी करने के निर्देश भी दिए गए हैं, ताकि आम नागरिक उल्लंघन की शिकायत कर सकें।

जिम्मेदार अडॉप्शन को बढ़ावा
कोर्ट ने पशु प्रेमियों के लिए यह रास्ता भी खोला है कि वे आवारा कुत्तों को गोद लेने के लिए आवेदन कर सकते हैं, लेकिन गोद लेने के बाद उन्हें दोबारा सड़कों पर छोड़ना अपराध की श्रेणी में आएगा। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि कोई व्यक्ति या एनजीओ इस आदेश में हस्तक्षेप करना चाहता है, तो व्यक्तिगत याचिकाकर्ता को 25 हजार रुपए और एनजीओ को दो लाख रुपए कोर्ट में जमा करने होंगे। यह धनराशि इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट और डॉग वेलफेयर में उपयोग की जाएगी।

अब पूरे देश में लागू होंगे दिशा-निर्देश
पहले दिल्ली-एनसीआर तक सीमित आदेश को अब देशव्यापी रूप दे दिया गया है। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि इस विषय से जुड़े सभी राज्यों के लंबित मामलों को सुप्रीम कोर्ट में ट्रांसफर किया जाएगा, ताकि एकीकृत नीति लागू हो सके।


