हिंदुस्तान तहलका / विष्णु हरि पाठक
चंडीगढ़। देश के प्रमुख रणनीतिक प्रतिष्ठानों की सुरक्षा में तैनात केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ ) अब उभरते आतंकवादी और हाई-टेक खतरों से निपटने के लिए और अधिक घातक व चुस्त बनता जा रहा है। इसी क्रम में सीआईएसएफ ने कश्मीर घाटी में भारतीय सेना की विशेष इकाइयों के साथ मिलकर बड़े पैमाने पर युद्धस्तर का संयुक्त प्रशिक्षण शुरू कर दिया है। पंजाब एवं हरियाणा सिविल सचिवालय, चंडीगढ़ के यूनिट कमांडर ललित पवार ने जानकारी देते हुए बताया कि यह प्रशिक्षण ड्रोन अटैक, फिदायीन हमलों, अंदरूनी खतरे, तोड़फोड़ जैसी जटिल स्थितियों में रैपिड रिस्पॉन्स को तेज, सटीक और शांत बनाए रखने के उद्देश्य से शुरू किया गया है।
पहली बार इतने व्यापक पैमाने पर हो रहा है प्रशिक्षण
पहले जहां केवल चुनिंदा जवानों को ही सेना के साथ ट्रेनिंग का मौका मिलता था, वहीं अब पहली बार बड़ी संख्या में क्विक रिएक्शन टीम (क्यूआरटी) के जवानों को घाटी में तैनात सेना की विशेष यूनिट्स के साथ प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसमें रात्रिकालीन ऑपरेशन, जंगल युद्ध, क्लोज कॉम्बैट और हाई-एंड्योरेंस ड्रिल्स शामिल हैं।
केवल सर्वश्रेष्ठ जवानों को ही मिला मौका
इस प्रशिक्षण में शामिल होने के लिए केवल वही जवान पात्र माने गए जिन्होंने एनएसजी मानकों के अनुरूप बीपीईटी (युद्ध शारीरिक दक्षता परीक्षण ) उत्तीर्ण किया है और जिनकी उम्र 35 वर्ष से कम है। सभी चयनित जवान पहले ही 6 महीने का आंतरिक कठिन प्रशिक्षण पूरा कर चुके हैं।
मिशन: हाई-रिस्क साइट्स की अभेद्य सुरक्षा
सीआईएसएफ देश के एयरपोर्ट, परमाणु संयंत्र, संसद भवन और अन्य हाई-वैल्यू टारगेट्स की सुरक्षा में तैनात है। ऐसे में यह युद्धस्तर का प्रशिक्षण बल की क्षमता को इस तरह से तैयार कर रहा है कि जवान किसी भी शहरी या ग्रामीण परिदृश्य में बहुआयामी आतंकी हमलों का सामना कर सकें।
पूरे देश में विस्तार की योजना
ललित पवार ने बताया कि सीआईएसएफ इस तरह के उन्नत सैन्य प्रशिक्षण को अन्य संवेदनशील इकाइयों तक भी विस्तार देने की योजना बना रहा है। आने वाले समय में यह रणनीति बल के सभी कर्मियों को शारीरिक, मानसिक और रणनीतिक रूप से उच्चतम स्तर पर तैयार करने में मदद करेगी।


