हिंदुस्तान तहलका / संवाददाता
ओखला बैराज से छोड़े गए 68 हजार क्यूसेक पानी के बाद बसंतपुर में पानी घुसा, प्रशासन अलर्ट मोड पर
फरीदाबाद। यमुना नदी का जलस्तर एक बार फिर तेजी से बढ़ने लगा है, जिससे फरीदाबाद के निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। रविवार रात दिल्ली स्थित ओखला बैराज से 68,025 क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बाद यमुना के जलस्तर में अचानक बढ़ोतरी दर्ज की गई है। सबसे ज्यादा असर बसंतपुर गांव में देखा जा रहा है, जहां पानी आबादी वाले हिस्सों तक पहुंच चुका है। जिला प्रशासन और सिंचाई विभाग की टीमें मौके पर पहुंच चुकी हैं और हालात पर नजर बनाए हुए हैं।
सिंचाई विभाग के एसडीओ अरविंद शर्मा ने बताया कि कल तक जलस्तर में गिरावट आ रही थी, लेकिन सोमवार सुबह से एक बार फिर पानी का स्तर तेजी से बढ़ने लगा है। उन्होंने बताया कि फरीदाबाद का यमुना क्षेत्र अधिकतम 1 लाख क्यूसेक पानी को संभाल सकता है, लेकिन लगातार डिस्चार्ज होने के कारण निचले क्षेत्रों में जलभराव की स्थिति बनने लगती है। बसंतपुर गांव में स्थिति गंभीर बनी हुई है, हालांकि अन्य गांवों में अभी पानी आबादी में नहीं घुसा है। मोहना और मंझावली इलाके के खेतों में खड़ी फसलें जलमग्न हो चुकी हैं, लेकिन वहां रहवासी इलाकों में नुकसान नहीं हुआ है।
दिल्ली में पिछले दो दिनों से बारिश नहीं हुई है, लेकिन यमुना का जलस्तर फिर भी लगातार बढ़ रहा है। इसका कारण हरियाणा और उत्तर प्रदेश से आने वाला पानी है, जिसे हथिनीकुंड, वजीराबाद और ओखला बैराज से छोड़ा जा रहा है। सोमवार दोपहर हथिनी कुंड बैराज से 49,604 क्यूसेक, वजीराबाद बैराज से 39,470 क्यूसेक और ओखला बैराज से 68,025 क्यूसेक पानी यमुना में छोड़ा गया है। इन बैराजों से छोड़ा गया पानी अगले 48 घंटों में फरीदाबाद पहुंचता है। सिंचाई विभाग का मानना है कि 17 अगस्त को हथिनीकुंड से छोड़ा गया 1.71 लाख क्यूसेक पानी 19 अगस्त तक फरीदाबाद पहुंचेगा, जिससे जलस्तर में और बढ़ोतरी संभव है। प्रशासन ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए यमुना किनारे बसे गांवों को अलर्ट पर रखा है। निगरानी के लिए टीमों की तैनाती की गई है और लोगों से अपील की गई है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और प्रशासन के निर्देशों का पालन करें। एसडीआरएफ और स्थानीय प्रशासनिक टीमें तैयार हैं और किसी भी आपात स्थिति से निपटने की व्यवस्था की जा रही है।
साल 2023 की भयावह बाढ़ को याद करते हुए प्रशासन कोई जोखिम नहीं लेना चाहता। उस वर्ष हथिनीकुंड से 3.22 लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने पर फरीदाबाद के कई गांव जलमग्न हो गए थे और बसंतपुर सहित कई गांवों को खाली कराना पड़ा था। हालांकि फिलहाल वैसी स्थिति नहीं है, लेकिन यमुना का लगातार बढ़ता जलस्तर प्रशासन के लिए चिंता का विषय बना हुआ है।
प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे यमुना नदी के किनारे न जाएं, बच्चों को दूर रखें और किसी भी आपात स्थिति में हेल्पलाइन 112 या स्थानीय अधिकारियों से संपर्क करें। जलस्तर की हर घंटे की निगरानी की जा रही है और यदि स्थिति बिगड़ती है तो प्रभावित इलाकों में रेस्क्यू व राहत कार्य शुरू किए जाएंगे।


