Thursday, May 21, 2026
No menu items!
spot_img
Homeअन्य राज्यमाता के दरबार में माथा टेकने पहुंची मेयर प्रवीण जोशी बत्रा

माता के दरबार में माथा टेकने पहुंची मेयर प्रवीण जोशी बत्रा

  • वैष्णो देवी मंदिर में दूसरे नवरात्रि पर हुई मां ब्रह्मचारिणी की पूजा

हिंदुस्तान तहलका / ऋचा गौर

फरीदाबाद। महारानी वैष्णो देवी मंदिर में दूसरे नवरात्रि पर मां दुर्गा के स्वरूप ब्रह्मचारिणी की भव्य पूजा अर्चना की गई। मंदिर में सुबह से ही भक्तों का ताँता लगना आरंभ हो गया। इस अवसर पर मेयर प्रवीण बत्रा जोशी ने वैष्णो देवी मंदिर में पहुंचकर माता ब्रह्मचारिणी की पूजा अर्चना में हिस्सा लिया। मंदिर संस्थान के प्रधान जगदीश भाटिया ने मेयर श्रीमती जोशी को माता की चुनरी और प्रसाद भेंट किया। इस अवसर पर उन्होंने आए हुए सभी अतिथियों को नवरात्रों की हार्दिक शुभकामनाएं दी। इस अवसर पर श्री भाटिया ने मां ब्रह्मचारिणी की महिमा का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि मां दुर्गा की नवशक्ति का दूसरा स्वरूप ब्रह्मचारिणी का है। यहां ब्रह्म का अर्थ तपस्या से है। मां दुर्गा का यह स्वरूप भक्तों और सिद्धों को अनंत फल देने वाला है। इनकी उपासना से तप, त्याग, वैराग्य, सदाचार और संयम की वृद्धि होती है। ब्रह्मचारिणी का अर्थ तप की चारिणी यानी तप का आचरण करने वाली। देवी का यह रूप पूर्ण ज्योतिर्मय और अत्यंत भव्य है। इस देवी के दाएं हाथ में जप की माला है और बाएं हाथ में यह कमंडल धारण किए हैं।

कथा के अनुसार पूर्वजन्म में इस देवी ने हिमालय के घर पुत्री रूप में जन्म लिया था और नारदजी के उपदेश से भगवान शंकर को पति रूप में प्राप्त करने के लिए घोर तपस्या की थी। इस कठिन तपस्या के कारण इन्हें तपश्चारिणी अर्थात्‌ ब्रह्मचारिणी नाम से अभिहित किया गया। एक हजार वर्ष तक इन्होंने केवल फल-फूल खाकर बिताए और सौ वर्षों तक केवल जमीन पर रहकर शाक पर निर्वाह किया।कुछ दिनों तक कठिन उपवास रखे और खुले आकाश के नीचे वर्षा और धूप के घोर कष्ट सहे। तीन हजार वर्षों तक टूटे हुए बिल्व पत्र खाए और भगवान शंकर की आराधना करती रहीं। इसके बाद तो उन्होंने सूखे बिल्व पत्र खाना भी छोड़ दिए। कई हजार वर्षों तक निर्जल और निराहार रह कर तपस्या करती रहीं। पत्तों को खाना छोड़ देने के कारण ही इनका नाम अपर्णा नाम पड़ गया।कठिन तपस्या के कारण देवी का शरीर एकदम क्षीण हो गया। देवता, ऋषि, सिद्धगण, मुनि सभी ने ब्रह्मचारिणी की तपस्या को अभूतपूर्व पुण्य कृत्य बताया, सराहना की और कहा- हे देवी आज तक किसी ने इस तरह की कठोर तपस्या नहीं की। यह तुम्हीं से ही संभव थी। तुम्हारी मनोकामना परिपूर्ण होगी और भगवान चंद्रमौलि शिवजी तुम्हें पति रूप में प्राप्त होंगे। अब तपस्या छोड़कर घर लौट जाओ। जल्द ही तुम्हारे पिता तुम्हें बुलाने आ रहे हैं।

इस देवी की कथा का सार यह है कि जीवन के कठिन संघर्षों में भी मन विचलित नहीं होना चाहिए। मां ब्रह्मचारिणी देवी की कृपा से सर्व सिद्धि प्राप्त होती है। दुर्गा पूजा के दूसरे दिन देवी के इसी स्वरूप की उपासना की जाती है। श्री भाटिया ने कहा कि मां ब्रह्मचारिणी की सच्चे मन से पूजा करने वाले भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। इस अवसर पर मंदिर में भाजपा नेता क़विंद्र चौधरी, रोहित भाटिया, आर के बत्रा, विनोद पांडे और अनीता शर्मा भी उपस्थित हुई।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments

Translate »