हिंदुस्तान तहलका / गीतिका
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने किया प्रथम दो दिवसीय शहरी निकाय राष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारंभ
ओम बिड़ला बोले – भारत ‘मदर ऑफ डेमोक्रेसी’ है
गुरुग्राम। मानेसर स्थित इंटरनेशनल सेंटर फॉर ऑटोमोटिव टेक्नोलॉजी (आईसीएटी) में शहरी स्थानीय निकायों के अध्यक्षों का पहला राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया गया। इस सम्मेलन का उद्घाटन लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने किया। दो दिवसीय इस भव्य आयोजन में देशभर से 500 से अधिक नगर निकाय प्रतिनिधियों, मेयर, आयुक्त और विशेषज्ञों ने भाग लिया। सम्मेलन का उद्देश्य शहरी शासन प्रणाली को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और जनहितकारी बनाना है।
उद्घाटन भाषण में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने कहा कि भारत मदर ऑफ डेमोक्रेसी है। यहां ग्राम सभाओं और जन चर्चाओं की परंपरा हजारों वर्षों से चली आ रही है। भारत में लोकतंत्र केवल संविधान की औपचारिकता नहीं है, बल्कि यह सामाजिक व्यवहार का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि स्थानीय निकाय लोकतंत्र की नींव हैं। जनता का सीधा संवाद नगर निकायों से होता है और जब योजनाएं इसी संवाद के आधार पर बनती हैं, तो उनका लाभ भी अधिकतम होता है। नगर परिषदों और नगर निगमों की बैठकें नियमित, मर्यादित और उद्देश्यपूर्ण होनी चाहिए।

ओम बिड़ला ने अफसोस व्यक्त किया कि कुछ नगर निगमों में सालभर बैठक नहीं होती। कभी होती भी है तो वह भी महज़ आधे घंटे की औपचारिकता बनकर रह जाती है। उन्होंने सुझाव दिया कि नगर निकायों की बैठकों में प्रश्नकाल, शून्यकाल, प्रस्तावों पर खुली बहस और पिछली कार्यवाही की समीक्षा जैसे प्रावधान अनिवार्य रूप से लागू किए जाएं। तभी लोकतंत्र की आत्मा जमीनी स्तर पर जीवंत रह पाएगी।

भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में अहम कदम: सीएम सैनी
सम्मेलन में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि यह पूरे राज्य के लिए गर्व का विषय है कि पहला राष्ट्रीय सम्मेलन हरियाणा की धरती पर हो रहा है। उन्होंने सभी अतिथियों का भगवान श्रीकृष्ण की नगरी से स्वागत किया। उन्होंने कहा कि शहरीकरण के दौर में यह सम्मेलन शहरी प्रशासन की दिशा में क्रांतिकारी पहल है। प्रधानमंत्री के विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए यह आयोजन मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने कहा कि हरियाणा सरकार शहरी विकास को प्राथमिकता दे रही है। ई-गवर्नेंस, डिजिटल पोर्टल्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) जैसी तकनीकों का उपयोग कर पारदर्शिता और सुशासन को बढ़ावा दिया जा रहा है। प्रॉपर्टी आईडी, परिवार पहचान पत्र, और स्वामित्व योजना जैसे कई डिजिटल प्रयास आमजन को सेवाएं पहुंचाने में सफल रहे हैं। उन्होंने बताया कि फरीदाबाद, करनाल जैसे शहरों को स्मार्ट सिटी मॉडल पर विकसित किया जा रहा है। साथ ही, चार महानगर क्षेत्रों के विकास के लिए प्राधिकरणों का गठन किया गया है।
श्री सैनी ने कहा कि ई-गवर्नेंस और टेक्नोलॉजी लोकतंत्र को नया आयाम दे रही हैं। नगर निकायों में प्रशासनिक पारदर्शिता बढ़ाने के लिए एआई आधारित समाधान, डिजिटल मीटिंग रिकॉर्डिंग, लाइव प्रसारण, और ऑनलाइन बजट रिपोर्टिंग जैसे नवाचार अपनाए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि हरियाणा देश का पहला राज्य है, जहां प्रॉपर्टी आईडी, परिवार पहचान पत्र और डिजिटल गवर्नेंस सिस्टम को एकीकृत किया गया है।
शहरी शासन को अधिक उत्तरदायी बनाने की जरूरत: विधानसभा अध्यक्ष
हरियाणा विधानसभा के अध्यक्ष हरविंद्र कल्याण ने सम्मेलन को विधायी संस्थाओं, प्रशासनिक इकाइयों और नगर निकायों के बीच संवाद, समन्वय और सहयोग की नई दिशा देने वाला बताया। उन्होंने कहा कि स्थानीय निकायों को उत्तरदायी, पारदर्शी और जन-भागीदारी आधारित बनाकर ही लोकतंत्र की जड़ों को और गहरा किया जा सकता है। उन्होंने अधिकारियों से अनुरोध किया कि इस सम्मेलन को केवल तकनीकी या प्रशासनिक दृष्टिकोण से न देखें, बल्कि इसके लोकतांत्रिक महत्व को समझें। उन्होंने कहा कि विधायिका केवल कानून निर्माण की संस्था नहीं है, बल्कि यह लोकतंत्र की आत्मा है। नगर निकाय इस आत्मा को ज़मीन पर साकार करते हैं।
शहरी निकाय वह सरकार है जिनका जनता से सीधा सरोकार है: विपुल गोयल
शहरी निकाय अध्यक्षों के राष्ट्रीय सम्मेलन में हरियाणा सरकार के शहरी निकाय एवं राजस्व मंत्री विपुल गोयल ने कहा कि शहरी स्थानीय निकाय नागरिक सेवा एवं नागरिक संपर्क की प्रथम एवं अहम कड़ी है। उन्होंने कहा कि शहरी निकाय वह सरकार है जिनका जनता से सीधा सरोकार है। लोकतंत्र की सबसे छोटी नहीं बल्कि सबसे महत्वपूर्ण एवं संवेदनशील इकाई हैं। उन्होंने सम्मेलन में पहुंचे लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, हरियाणा विधानसभा अध्यक्ष हरविन्द्र कल्याण व देश भर से आए शहरी निकाय जन प्रतिनिधियों का धन्यवाद व्यक्त किया।
विकसित शहरों के मॉडल से सीखेंगे अन्य नगर निकाय
सम्मेलन के पहले दिन इंदौर, सूरत, विशाखापट्टनम, पुणे, भुवनेश्वर, कोयंबटूर और लखनऊ के मेयर और कमिश्नरों ने अपने-अपने शहरों के विकास मॉडल प्रस्तुत किए। इन मॉडलों में स्वच्छता, नागरिक सेवाएं, ई-गवर्नेंस, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, ट्रैफिक नियंत्रण और हरित क्षेत्र विस्तार जैसे विषयों को शामिल किया गया। इन कार्यप्रणालियों को देश के अन्य शहरों में भी लागू करने की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं।
सम्मेलन को पांच मुख्य सत्रों में विभाजित किया गया
| आम परिषद की बैठकों के संचालन के लिए मॉडल प्रक्रिया संहिता बनाना |
| नगरपालिका शासन को संवैधानिक जनादेश के अनुरूप प्रभावी बनाना |
| विकसित भारत 2047 के लक्ष्य में नगर निकायों की भूमिका तय करना |
| महिलाओं को सामाजिक और राजनीतिक नेतृत्व के लिए तैयार करना |
| जन सेवाओं की अंतिम छोर तक पहुंच और नागरिक जीवन को बेहतर बनाना |
प्रशासनिक सहभागिता और समर्पण जरूरी: डीसी
जिला उपायुक्त अजय कुमार ने बताया कि सम्मेलन का उद्देश्य शहरी प्रशासन को नवाचारोन्मुख, समावेशी और उत्तरदायी बनाना है। उन्होंने कहा कि यह सम्मेलन ‘विकसित भारत 2047’ की अवधारणा को मूर्त रूप देगा। उन्होंने प्रतिनिधियों से आग्रह किया कि वे अपने अनुभव साझा करें और नए विचारों को अपनाएं।
सम्मेलन को यादगार बनाने पर जोर
सम्मेलन के उद्घाटन अवसर पर हरियाणा विधानसभा उपाध्यक्ष डॉ. कृष्ण मिड्ढा, राज्य सरकार के वरिष्ठ मंत्री विपुल गोयल, राव नरबीर सिंह और अन्य गणमान्य जनप्रतिनिधि भी उपस्थित रहे। हरियाणा सरकार ने मेहमानों के आतिथ्य और आयोजन की व्यवस्था को भव्य और सुव्यवस्थित बनाने के लिए विशेष तैयारियां की थी, ताकि यह सम्मेलन न केवल परिणामों के लिहाज़ से, बल्कि अनुभव के स्तर पर भी स्मरणीय बन सके।


