- हादसे के 13 घंटे बाद राहत, पटरी पर लौटी कई ट्रेनें
- यात्रियों को मिली राहत
Hindustan Tehelka News / शिवांगी चौधरी
मथुरा। त्योहारों के बीच रेल यात्रियों को उस समय भारी परेशानी का सामना करना पड़ा जब मंगलवार रात मथुरा के वृंदावन रोड और आझई रेलवे स्टेशन के बीच कोयले से लदी मालगाड़ी के 12 डिब्बे पटरी से उतर गए। राहत की बात यह है कि इस हादसे में कोई जनहानि नहीं हुई। हादसे के बाद दिल्ली-आगरा रेलमार्ग पर ट्रेनों की आवाजाही पूरी तरह से बाधित हो गई थी। लगभग 13 घंटे की मशक्कत के बाद बुधवार सुबह रेल संचालन आंशिक रूप से बहाल किया गया।

कैसे हुआ हादसा?
रात 8:03 बजे दिल्ली की ओर जा रही मालगाड़ी के डिब्बे अचानक पटरी से उतर गए और एक के बाद एक पलट गए। हादसे का कारण प्रारंभिक जांच में कपलिंग खुलना बताया जा रहा है, जिससे इंजन बाकी गाड़ी से अलग होकर आगे निकल गया। पलटे डिब्बों ने ट्रैक को बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया, ओएचई लाइनें टूट गईं और स्लीपर उखड़ गए।
रेलवे टीम ने तुरंत राहत कार्य शुरू किया। जेसीबी और भारी क्रेनों की मदद से रातभर डिब्बों को हटाने का कार्य जारी रहा। बुधवार सुबह 6 बजे तक सभी डिब्बों को ट्रैक से हटा लिया गया। इसके बाद ट्रैक की मरम्मत शुरू हुई।

हादसे के बाद शुरू हुआ ट्रेन संचालन
हादसे के बाद सबसे पहले चौथी लाइन से ट्रेनों का संचालन शुरू किया गया। मंगलवार रात 10:05 बजे सबसे पहले होशियारपुर एक्सप्रेस को रवाना किया गया। इसके बाद क्रमशः आगरा-पलवल पैसेंजर, सोगरिया एक्सप्रेस, और पंजाब मेल को निकाला गया। बुधवार सुबह 9:56 बजे से तीसरी लाइन से अप रूट पर ट्रेनों का संचालन शुरू हुआ। इस रूट पर सबसे पहले कांगो एक्सप्रेस को रवाना किया गया, जिसके बाद 10:11 बजे पुनः होशियारपुर एक्सप्रेस को चलाया गया।
कौन-कौन सी ट्रेनें हुईं प्रभावित?
इस हादसे के कारण कई प्रमुख ट्रेनों का संचालन या तो रद्द हुआ या देर से चला। अप रूट पर मेवाड़ एक्सप्रेस, हरिद्वार-बांद्रा एक्सप्रेस, उत्तर प्रदेश संपर्क क्रांति, केरला एक्सप्रेस, कर्नाटक एक्सप्रेस ट्रेनें प्रभावित हुई। वहीं डाउन रूट पर नंदा देवी एक्सप्रेस, शताब्दी एक्सप्रेस, पंजाब मेल ट्रेन प्रभावित रही। सोगरिया एक्सप्रेस रात से ही खड़ी थीं। वहीं दिल्ली की तरफ से गोंडवाना एक्सप्रेस आखिरी ट्रेन थी जो शाम 7:15 बजे रवाना हुई।
यात्रियों की दिक्कतें और रेलवे की अपील
रातभर ट्रेनें रुकी रहीं, जिससे यात्रियों को भूख-प्यास और थकान का सामना करना पड़ा। मथुरा स्टेशन पर हेल्प डेस्क लगाया गया ताकि लोगों को सही जानकारी मिल सके। रेलवे प्रशासन ने यात्रियों से धैर्य रखने की अपील की है और भरोसा दिया है कि दोपहर तक ट्रैक पूरी तरह बहाल हो जाएगा।
फिर वही जगह, फिर वही हादसा
हैरानी की बात यह है कि 18 सितंबर 2022 की रात भी इसी ट्रैक पर, और लगभग इसी स्थान पर एक मालगाड़ी डिरेल हुई थी। तब 28 डिब्बे पटरी से उतर गए थे। उस ट्रेन में करीब 1820 टन कोयला लदा था, जो बारिश के कारण मिट्टी में मिल गया था। उस हादसे में रेलवे को लगभग 50 लाख रुपये का नुकसान हुआ था और 100 से ज्यादा ट्रेनें प्रभावित, जबकि 34 ट्रेनें रद्द करनी पड़ी थीं।
अब फिर से एक साल के भीतर दूसरी दुर्घटना ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या ट्रैक की समय पर मरम्मत, जांच और निगरानी नहीं हो रही है? स्थानीय लोगों ने उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
साजिश की भी आशंका
इस बार की दुर्घटना में कुछ डिब्बे बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुए हैं और पूरी तरह पलट गए हैं, जिससे साजिश की आशंका भी जताई जा रही है। कुछ लोगों का मानना है कि संभवतः ट्रैक पर कोई वस्तु रखी गई हो। हालांकि रेलवे अधिकारियों ने अभी इस बारे में कुछ भी स्पष्ट कहने से इनकार किया है। उनका कहना है कि प्राथमिकता ट्रेनों का संचालन बहाल करना है, इसके बाद हादसे की विस्तृत जांच की जाएगी।


