एसडीएम को सौंपा ज्ञापन
तहलका जज्बा / राकेश वर्मा
नूंह – आईएमटी सोहना (IMT Sohna) में जिन 9 गांव के किसानों की जमीन का अधिग्रहण हुआ था। अब एक बार फिर से वह किसान अपने मुआवजा को लेकर लामबंद होने लगे हैं। हालांकि सरकार ने उनको पहले ही मुआवजा दे दिया है, लेकिन किसानों का कहना है कि उन्हें जो मुआवजा राशि दी गई थी। उस समय उनके साथ धोखा किया गया था। अब उनको मच्छगर, चंदावली गांव की तर्ज पर मुआवजा दिया जाना चाहिए।
नूंह जिले के नौ गांव के किसानों को समर्थन देने के लिए भारतीय किसान यूनियन (Indian Farmer’s Union) के युवा प्रदेश अध्यक्ष रवि आजाद गुरुवार को धीरधोका गांव में आयोजित किसान पंचायत में पहुंचे। किसान पंचायत में नौ गांव के सैकड़ों किसानों ने भाग लिया। जिनमें महिलाओं की भी अच्छी खासी संख्या देखी गई। किसानों के विरोध और संख्या को देखते हुए जिला प्रशासन की तरफ से उपमंडल अधिकारी नूंह अश्वनी कुमार मौके पर पहुंचे और उनको किसानों ने
मुख्यमंत्री मनोहर लाल के नाम ज्ञापन सौंपा।
भारतीय किसान यूनियन (Indian Farmer’s Union) के युवा प्रदेश अध्यक्ष रवि आजाद ने कहा कि जो मच्छर और चंदावली गांव के किसानों को माननीय कोर्ट के आदेश पर प्रति एकड़ 2 करोड रुपए दिया गया है। हमारे किसानों की मांग है कि यहां के किसानों को भी ब्याज सहित इतनी ही मुआवजा राशि दी गई दी जाए, जो हलफनामा भूमि अधिग्रहण के समय किसानों से लिया गया था, उसे रद्द किया जाए। उन्होंने कहा कि किसानों का अनिश्चितकालीन धरना जब तक जारी रहेगा जब तक सरकार इन किसानों की बात नहीं मान लेगी।
रवि आजाद ने कहा कि प्रशासन की तरफ से एसडीएम नूंह ने मौके पर जाकर किसानों का ज्ञापन लिया है। आगामी 9 मार्च को हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल नूंह में आ रहे हैं। कमेटी ने फैसला लिया है कि जब सीएम मेवात के दौरे पर आए तो अधिकारी यहां के किसानों की गठित कमेटी की मीटिंग मुख्यमंत्री हरियाणा के नाम कराएं, ताकि उनको किसानों की मांगों से अवगत कराया जाए। प्रशासन की तरफ से किसानों को भरोसा मिला है कि कमेटी के पदाधिकारी की बैठक हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल के साथ कराई जाएगी। किसान नेता रवि आजाद ने कहा कि शिक्षा इत्यादि क्षेत्रों में यही इलाका काफी पिछड़ा हुआ है। यहां के किसानों को रोजगार, स्वास्थ्य, गांव के विकास इत्यादि पर भी ध्यान देना चाहिए। यहां के किसान भी लड़ाई लड़ने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं। अगर सरकार ने मांगों को नहीं माना तो भाकियू किसानों के साथ है।


