शिक्षा विभाग ने कहा- तय समय तक नहीं दी सही जानकारी, तो होगी मान्यता रद्द या फीस बढ़ोतरी पर रोक
हरियाणा के निजी स्कूलों में फीस संरचना को लेकर एक बार फिर विवाद खड़ा हो गया है। राज्य के शिक्षा विभाग ने पाया है कि कई मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों ने Form-6 में ‘Under Head Fees’ को जानबूझकर ‘शून्य (0)’ दर्शाया है, जिससे यह आभास होता है कि वे किसी प्रकार की वैकल्पिक या अतिरिक्त फीस नहीं वसूलते। लेकिन वास्तविकता इससे बिलकुल अलग है।
क्या है मामला?
हर साल हरियाणा के 10,701 मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों को MIS पोर्टल के माध्यम से Form-6 भरना होता है, जिसमें स्कूल की बुनियादी जानकारी, फीस स्ट्रक्चर और अन्य सुविधाएं शामिल होती हैं। यह विवरण स्कूल की वेबसाइट और नोटिस बोर्ड पर सार्वजनिक करना भी अनिवार्य है।
हालांकि, इस बार कई स्कूलों ने Under Head फीस — यानी कि ट्रांसपोर्ट, स्मार्ट क्लास, कंप्यूटर लैब, कोचिंग क्लास, सांस्कृतिक कार्यक्रमों जैसी सेवाओं के नाम पर ली जाने वाली अतिरिक्त फीस — को ‘शून्य’ दिखाया है। शिक्षा विभाग का कहना है कि यह सीधी-सी धोखाधड़ी है और फॉर्म में गलत जानकारी देना नियमों का उल्लंघन है।
31 जुलाई तक अंतिम मौका, फिर कार्रवाई तय-
शिक्षा निदेशालय ने 19 जुलाई को पत्र जारी कर सभी संबंधित स्कूलों को 31 जुलाई तक का समय दिया है कि वे Form-6 में सही जानकारी अपडेट करें। इसके बाद यदि किसी भी स्कूल द्वारा गलत या अधूरी जानकारी दी गई पाई गई, तो उस पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
इसमें शामिल हो सकते हैं:
उस साल कोई भी फीस वृद्धि की अनुमति नहीं दी जाएगी।
जरूरत पड़ी तो स्कूल की मान्यता रद्द करने की कार्रवाई भी की जा सकती है।
Under Head Fees क्या होती है?
Under Head Fees वे शुल्क होते हैं जो स्कूल छात्रों से निम्न सेवाओं के बदले में वसूलते हैं:
- ट्रांसपोर्ट सुविधा
- स्मार्ट क्लास
- कंप्यूटर लैब
- अतिरिक्त कोचिंग क्लास
- सांस्कृतिक या खेल गतिविधियां
इन सेवाओं के लिए फीस सिर्फ उन्हीं छात्रों से ली जा सकती है जिन्होंने स्वेच्छा से इसका विकल्प चुना हो। इसके बावजूद, कई स्कूल सभी छात्रों से इन सेवाओं के नाम पर अनिवार्य शुल्क वसूलते हैं, जो नियमों के खिलाफ है।
अब क्या होगा?
राज्य शिक्षा विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि Form-6 की गलत जानकारी देने वाले स्कूलों को बख्शा नहीं जाएगा। सर्वे और निरीक्षण के बाद विभाग ऑन-स्पॉट कार्रवाई करेगा। इस कदम का उद्देश्य स्कूल फीस में पारदर्शिता लाना और अभिभावकों को अनुचित आर्थिक बोझ से बचाना है।
अभिभावकों की क्या है राय?
अभिभावकों का कहना है कि यह निर्णय सराहनीय है, लेकिन यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि स्कूल प्रभावी निरीक्षण से बच न निकल जाएं। वे मांग कर रहे हैं कि स्कूलों की फीस संरचना की ऑनलाइन सार्वजनिक निगरानी के लिए एक समर्पित पोर्टल शुरू किया जाए। इस निर्णय पर अभिभावकों के लिए काम करने वाले भरत रावत ने कहा है की फैसला तो अच्छा है, अब ज़रूरत है इसे ज़मीन पर ईमानदारी से लागू करने की — वरना अभिभावकों का शोषण यूं ही चलता रहेगा
हरियाणा में शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता लाने के लिए उठाया गया यह कदम निजी स्कूलों की जवाबदेही तय करने की दिशा में एक बड़ा प्रयास है। यदि शिक्षा विभाग अपनी चेतावनियों पर अमल करता है, तो यह भविष्य में फीस से जुड़े शोषण पर अंकुश लगाने में कारगर सिद्ध हो सकता है।


