हिंदुस्तान तहलका / विष्णु हरि पाठक
नई दिल्ली,1 अगस्त 2025
ट्रंप के टैरिफ़ के फैसले से उभरा नया भू-राजनीतिक तनाव
एक अगस्त से भारत से आयात होने वाले कई उत्पादों पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 25% टैरिफ़ लगाने का ऐलान कर दिया है। इस कदम ने भारत-अमेरिका व्यापारिक रिश्तों में हलचल मचा दी है और साथ ही दोनों देशों के बीच रणनीतिक समीकरणों को भी प्रभावित किया है।
बावजूद इसके कि ट्रंप ने भारत को दोस्त देश कहा उन्होंने यह भी जोड़ा कि भारत के साथ व्यापार करना सबसे कठिन है और यह पहली बार नहीं है जब उन्होंने भारत को टैक्स किंग करार दिया है।
कभी हाउडी मोदी आज टैरिफ़ की सख़्ती
सितंबर 2019 में अमेरिका के ह्यूस्टन में हुए हाउडी मोदी कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुले मंच से कहा था अबकी बार ट्रंप सरकार। यह ट्रंप के लिए एक बड़ी राजनयिक जीत मानी गई थी।
फरवरी 2020 में ट्रंप की अहमदाबाद यात्रा और व्हाइट हाउस में दोनों नेताओं की बार-बार मुलाक़ातों से रिश्ते मजबूत दिखाई दे रहे थे।
लेकिन 2025 आते-आते यह समीकरण काफी बदल चुके हैं:ट्रंप के पहले कार्यकाल की गर्मजोशी अब दिखाई नहीं देती।
सीज़फायर पर ट्रंप के एकतरफा बयानों ने भारत को चौंका दिया है ट्रंप की पाकिस्तान फ्रेंडली अप्रोच भी भारत के लिए असहज रही।
टैरिफ़ की अर्थव्यवस्था पर मार: कितना नुकसान?
प्रभावित सेक्टर्स:फार्मा,जेम्स एंड ज्वेलरी,टेक्सटाइल और परिधान,स्टील और एल्युमिनियम,ऑटो पार्ट्स और कृषि उत्पाद
वर्ष भारत-अमेरिका कुल व्यापार भारत का अमेरिका को निर्यात
2024 $129.2 अरब $87.4 अरब
टैरिफ़ से परे: रिश्तों में और क्या तनाव है?
1. पाकिस्तान पर ट्रंप की नर्मी: ट्रंप ने पाक आर्मी चीफ़ आसिम मुनीर को व्हाइट हाउस में बुलाया और भारत-पाक के संघर्ष विराम में सीधे हस्तक्षेप का दावा किया जिसे भारत ने खारिज किया।
2. पीएम मोदी ने संसद में साफ कहा: ऑपरेशन सिंदूर के दौरान किसी देश के कहने पर सीज़फायर नहीं हुआ।
3. रूस से भारत का व्यापार: अमेरिका चाहता है कि भारत रूस से तेल और हथियारों की खरीद बंद करे। ट्रंप ने चेतावनी दी है कि रूस से व्यापार पर पेनल्टी लगेगी। इसके अलावा ब्रिक्स और आरआईसी देशों पर भी अतिरिक्त टैरिफ की बात की जा रही है।
क्या भारत-चीन-रूस करीब आएंगे?
इंद्राणी बागची का मानना है:चीन के साथ भारत का व्यापार बढ़ सकता है लेकिन रणनीतिक साझेदारी मुमकिन नहीं। हाँ, रूस-भारत-चीन त्रिपक्षीय सहयोग की संभावनाएं ज़रूर बढ़ी हैं।
भारत यूरोपीय यूनियन और यूके जैसे विकल्पों पर FTA कर टैरिफ के असर को संतुलित करने की कोशिश में है।
अमेरिका के सहयोगियों पर भी सख़्ती-
ट्रंप की यह नीति सिर्फ भारत तक सीमित नहीं
ब्राज़ील पर 50% टैरिफ
जापान, दक्षिण कोरिया, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया से बातचीत रुकी
चीन पर टैरिफ के जवाब में रेयर अर्थ मिनरल्स की सप्लाई पर रोक
आगे क्या?
90 दिन की ट्रेड डील छूट खत्म – अब टैरिफ लागू
भारत की रणनीति पर सबकी नज़र – क्या जवाबी टैरिफ लगाएगा?
क्वाड और इंडो-पैसिफिक फोकस – रिश्तों का भविष्य यहीं तय होगा
अमेरिकी चुनाव नज़दीक – क्या ट्रंप का यह फैसला घरेलू राजनीति के लिए है?
भारत और अमेरिका के रिश्ते सिर्फ आर्थिक नहीं रणनीतिक और वैचारिक साझेदारी पर आधारित हैं। ट्रंप के टैरिफ से रिश्तों में जो ठंडापन आया है वो अस्थायी भी हो सकता है – बशर्ते ट्रेड डील पर फिर से विश्वास बहाल हो।
लेकिन भारत को अब ये समझना होगा कि एक ही धुरी पर विदेश नीति नहीं टिक सकती। उसे बहु-ध्रुवीय कूटनीति, विकल्पों की खोज और आत्मनिर्भर आर्थिक ढांचे पर ज़ोर देना होगा।


